Thursday, 30 January 2020

रखवाले आज़ादी के


कुछ तो ज़रूर उन हवाओं में खास होगा जो गांव छोड़ सरहदों का रुख किया है
     कुछ तो सुकून मोहबते-वतन में भी होगा जो सब रिश्ते छोड़ आयें हैं पीछे
कुछ तो बड़ा कीमती मिलता होगा उन सीमाओं पर जो अपनी जान से भी ज्यादा अज़ीज होगा
    बस इसी को पाने वो भारत माता के वीर बड़ी जिंदादिली से मौत को हराने चले आते हैं

                                                                                         Aditya Vikram Singh



Friday, 10 January 2020

गैऱ कश्मीरी की कलम से

मैं कश्मीरी तो नहीं पर हिंदुस्तानी तो हूँ
मुक्कमल नहीं तो क्या, पर कहानी तो हूँ

वो लम्हे आज भी उन पर सिहरन सी लेकर आते हैं
आंखे नम हो जाती हैं और ज़ुबान लड़खड़ाते हैं

वो शरद ऋतु की रात थी बर्फ की चादर सरकी थी
कश्मीर हुआ था खाक, एक ऐसी आग भड़की थी

जले थे घर और बहा था खून, क़त्लेआम हुआ अधिकारों का
 बेघर हुए कश्मीरी पंडित और कश्मीर हुआ मक्कारों का

ना सविंधान बचा न सरकारें जब घाटी हो गई गद्दारों की
  आतंकवाद की जीत हुई और हार हुई हक़दारो की

                                                   Aditya Vikram Singh
                                                    एक कविता बिहार से

#kashmir #kashmiripandit



हाल ए हिंदुस्तान

अफवाहों का बाज़ार गरम है , तुम अपना नजरिया अपना  रखना
       हज़ार बातें कहेंगे तुमसे, बिना परखे यकीं न करना

   वो कहेंगे अपना धर्म बताओ, तुम हिंदुस्तानी पर अड़े रहना
वो कहेंगे कौम के साथ आओ , तुम सविंधान के साथ खड़े रहना

कोई केसरिया ले कर आएगा, कोई हरा रंग दिखाएगा
 तुम बिना किसी दो राय के तिरंगा लिए खड़े रहना

     तुम विरोध करो विद्रोह नहीं, लोकतंत्र का अधिकार है
क्यूंकि हुकूमत कोई और नहीं तुम्हारी अपनी चुनी सरकार है

तुम मुखर करो आवाज़ को, ज़रूरत नहीं होगी पत्थरबाजों को लाने की
तुम सच की आग लेकर आये हो तो ज़रूरत नहीं कुछ भी जलाने की

आवाज़ों को सुना भी जाएगा और अपराधिओं को कुचला भी जाएगा
     तुम किस ओर हो ये फैसला सिर्फ सच के वजूद पर करना

अफवाहों का बाज़ार गरम है , तुम अपना नजरिया अपना  रखना
       हज़ार बातें कहेंगे तुमसे, बिना परखे यकीं न करना

                                                          Aditya Vikram Singh
                                                           एक कविता बिहार से