अफवाहों का बाज़ार गरम है , तुम अपना नजरिया अपना रखना
हज़ार बातें कहेंगे तुमसे, बिना परखे यकीं न करना
वो कहेंगे अपना धर्म बताओ, तुम हिंदुस्तानी पर अड़े रहना
वो कहेंगे कौम के साथ आओ , तुम सविंधान के साथ खड़े रहना
कोई केसरिया ले कर आएगा, कोई हरा रंग दिखाएगा
तुम बिना किसी दो राय के तिरंगा लिए खड़े रहना
तुम विरोध करो विद्रोह नहीं, लोकतंत्र का अधिकार है
क्यूंकि हुकूमत कोई और नहीं तुम्हारी अपनी चुनी सरकार है
तुम मुखर करो आवाज़ को, ज़रूरत नहीं होगी पत्थरबाजों को लाने की
तुम सच की आग लेकर आये हो तो ज़रूरत नहीं कुछ भी जलाने की
आवाज़ों को सुना भी जाएगा और अपराधिओं को कुचला भी जाएगा
तुम किस ओर हो ये फैसला सिर्फ सच के वजूद पर करना
अफवाहों का बाज़ार गरम है , तुम अपना नजरिया अपना रखना
हज़ार बातें कहेंगे तुमसे, बिना परखे यकीं न करना
Aditya Vikram Singh
एक कविता बिहार से